Tuesday, October 1, 2013

Jai Jai aarti Aadijinanda | जय जय आरति आदि जिणंदा

जय जय आरति आदि जिणंदा, 
नाभिराया मरुदेवी को नंदा ।।1।।

पहेली आरति पूजा कीजे, 
नरभव पामीने लाहो लीजे ।।2।।

दुसरी आरति दीन दयाला, 
धुळेवा मंडपमां जग अजवाळा ।।3।।

तीसरी आरति त्रिभुवन देवा, 
सुरनर इन्द्र करे तोरी सेवा ।।4।।

चोथी आरति चउगति चुरे, 
मनवांछित फल शिवसुख पुरे ।।5।।

पंचमी आरति पुन्य उपाया, 
मूळचन्दे ऋषभ गुण गाया ।।6।।

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Deepak bolta nahi, uska prakash parichay deta hai. thik ussi prakar aap apne bare me kuch na bole, achhe karm karte rahe, wahi aapka parich...