Tuesday, October 1, 2013

Mangal Dipak (Divo) | मंगळ दीपक (दीवो) आरती


दीवो रे दीवो प्रभु मंगलिक दीवो, 
आरति उतारण बहु चिरंजीवो ।।1।।

सोहामणुं घेर पर्व दीवाळी, 
अम्बर खेले अमरा बाळी ।।2।।

दीपाळ भणे एणे कुल अजुआळी, 
भावे भगते विघन निवारी ।।3।।

दीपाळ भणे एणे ए कलिकाळे, 
आरति उतारी राजा कुमारपाळे ।।4।।

अम घेर मंगलिक तुम घेर मंगलिक, 
मंगलिक चतुर्विध संघने होजो ।।5।।

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Deepak bolta nahi, uska prakash parichay deta hai. thik ussi prakar aap apne bare me kuch na bole, achhe karm karte rahe, wahi aapka parich...